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भारत के राष्ट्रीय दल – बाबासाहेब द्वारा ‘मूकनायक’ के लिए 10 अप्रैल 1920 को लिखा गया छठवां संपादकीय

कोई भी सार्वजनिक काम हो, यदि कोई कहता होगा कि मैं उसे अकेला ही कर लूंगा, किंतु वह काम उससे हो ही नहीं पाएगा। तथापि समझदार लोगों को उसके अहंकार व अकड़ पर तरस आएगा। मनुष्य के विचार कितने भी उदार हों,…

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अपनी अलग पहचान और प्रतिक ढूंढ़ती शूद्र-OBC (मराठा, जाट, गुज्जर, पटेल, आदि) जातियाँ

भारत की कुछ मज़बूत और बड़ी शूद्र-OBC (मराठा, जाट, गुज्जर, पटेल, यादव, आदि) जातियाँ अब ब्राह्मणवाद से अलग, अपनी एक स्वतंत्र पहचान और प्रतिक ढूंढ़ने की प्रक्रिया से गुजर रही हैं।

आधुनिक भारत में ब्राह्…

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जो लोग करोड़ों लोगों को अछूत और अपराधी मानते हो उन्हें आजादी मांगने का हक नहीं – बाबासाहेब अम्बेडकर

अस्पृश्यों के एकमात्र नेता और भारत सरकार के कार्यकारी मंडल के सदस्य डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर दिनांक 14 जनवरी, 1946 को सुबह मद्रास मेल से सोलापुर आए।

सुबह सोलापुर नगरपालिका और जिला लोकल बोर्ड संस्था…

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यह स्वराज्य न होकर हम पर राज्य है! – डॉक्टर बाबा साहब अंबेडकर द्वारा मूकनायक के लिए लिखा गया तीसरा संपादकीय

(डॉक्टर बाबा साहब अंबेडकर द्वारा मूकनायक के लिए 28 फरवरी 1920 को लिखा गया तीसरा संपादकीय)

पिछले अंक में राष्ट्रीय सभा जिला- *कांग्रेस* की बढ़ती हुई भूख पर चर्चा हुई। ब्रिटिश राज्य पद्धति को सुराज…

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साहब कांशी राम और भारतीय राजनीति

साहब कांशी राम का जन्म 15 मार्च 1934 को अपने नैनिहाल पिरथी पुर बुंगा साहिब, जिला रोपड़, पंजाब में हुआ था। उनकी माता का नाम बिशन कौर और पिता का नाम सरदार हरी सिंह था। उनका पैतृक गाँव खुआसपुर, जिला रो…

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डॉ बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा मूकनायक के लिए 4 फरवरी, 1920 को लिखा गया दूसरा संपादकीय

*स्वराज्य की बराबरी सुराज्य नहीं कर सकता है*

(डॉ बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा मूकनायक के लिए 4 फरवरी, 1920 को लिखा गया दूसरा संपादकीय)

आज तक ज्ञात भूगोल की ओर राजनैतिक दृष्टि से देखने पर हम देशों को …

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