साइमन कमीशन का हिन्दुओं द्वारा विरोध का सच


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30 मार्च, 1927 को हाउस ऑफ कॉमन्स में स्टेचुटरी कमीशन की नियुक्ति पर “लॉर्ड बर्केनहेड” के बयान पर ध्यान दीजिए –

“मुझे दलितों के मामलों में गौर करना है। भारत में दलितों की करोड़ों में जनसंख्या है। उनकी दशा दिल दहला देने वाली और ह्रदय पर चोट करने वाली है। उन्हें सभी प्रकार का सामाजिक व्यवहार से दूर रखा गया है। इस वर्ग का व्यक्ति यदि उच्च वर्ण के बीच आ जाता है तो सूर्य का प्रकाश अपवित्र हो जाता है। वे सार्वजनिक जलस्रोत से पानी नहीं पी सकते। अपनी प्यास बुझाने के लिए उन्हें मीलों भटकना पड़ता है। उन्हें सैकड़ों पीड़ियों से अछूत कहा जाता है…! तो क्या इस कमीशन में कोई दलित वर्ग का प्रतिनिधि नहीं होना चाहिए? लोकतंत्र पर विश्वास रखने वाला कोई भी व्यक्ति, हमारे विरोधियों समेत, इसका कोई विरोध नहीं करेगा। मैं ऐसा कोई कमीशन बनाने के लिए तैयार नहीं जिसमें इस वर्ग का प्रतिनिधि न हो।”

उसके बाद फरवरी, 1928 में साइमन कमीशन जब भारत आया तो सभी हिन्दू एकजुट होकर काले झंडे और साइमन वापस जाओ के नारे लगाकर जबरदस्त विरोध कर रहे थे। इन विरोध करने वालों में तथाकथित प्रगतिशील और स्वंय को सर्वहारा/दलित हितैषी बताने वाले भी थे।

पर साइमन कमीशन बहुजनों के लिए कितना उपयोगी था इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि इस आयोग का बहुजन नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह स्वागत किया। कई छोटी-बड़ी सभाएं की और समर्थन में जवाबी नारे भी लगाए।

28 नवम्बर 1928 को लखनऊ में यह आयोग आया तो बहुजन वर्ग के नवयुवक कार्यकर्ता रामचरण मल्लाह और शिवदयाल सिंह चौरसिया तथा ननकूराम कोरी ने इस आयोग के स्वागत में चार बाग में नौटंकी और सभा का आयोजन किया। उनका कहना था कि भारत में दबी-कुचली, अस्पृश्य-दलित के साथ ब्राह्मण/सवर्ण द्वारा जो असमानता का दुर्व्यवहार होता है उसे यह आयोग देखेगा।

दिल्ली में चौधरी यादराम (आर्य पुरा) और सरदार पृथ्वी सिंह जाटव (पहाड़गंज) ने भी एक सभा आयोजित की। कानपुर के कुछ स्थानों पर बहुजनों के मुहल्लों में इस आयोग के साथ डॉ. अंबेडकर और स्वामी अछूतानंद भी अवलोकन और जाँच के समय उपस्थित थे। इस अवसर पर मजदूर नेता छेदीलाल मिस्त्री और बाबूराम नारायण कोरी भी मौजूद थे। आगरा के बौहरे खेमचंद जाटव जो 1920-30 तक जिला बॉर्ड, आगरा के सदस्य थे, वो भी आयोग के समक्ष साक्ष्य देने के लिए उपस्थित हुए।

सतारा जिला महार संस्था के अध्यक्ष ज्ञानदेव ध्रुवनाथ घोलप ने साइमन कमीशन को अपने ज्ञापन में अछूतों-दलितों के लिए मुस्लिमों की तरह निर्वाचक मंडल की मांग रखी। साइमन कमीशन का अछूतों ने ही नहीं बल्कि पिछड़ी जातियों ने भी जमकर स्वागत किया था।

साइमन कमीशन के सम्मुख 18 दलित संगठनों ने अपने साक्ष्य प्रस्तुत किए थे, जिनमें से 16 संगठनों ने पृथक निर्वाचन प्रणाली की माँग रखी थी। डॉ. अंबेडकर ने अल्पसंख्यकों की रक्षा हेतु वीटो पावर, विधायिका, निकायों, विश्वविद्यालयों आदि में जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण, नौकरियों में छूट, मंत्रीमंडल में प्रतिनिधित्व, शिक्षा में विशेष अनुदान आदि माँगे रखी थी जिस पर आयोग का रवैया सकारात्मक था।

इस कमीशन की वजह से अछूतों की स्थिति में सुधार होने वाला था तो हिन्दुओं को ये कैसे बरदाश्त होता…इसी वजह से तथाकथित भगतसिंह जैसे प्रगतिशील कह जाने वाले भी तमाम हिन्दुओं के साथ “साइमन गो बैक” के नारे लगा रहे थे।

Author – Satyendra Singh

Read -  Castes and Myths – Bust the Myths

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1 comment

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  1. 1
    r.c.vivek

    Simon commission was came in India for welfare of all sc/st/obc and in the interest of the country but Manuwadi did not like it and they had say that simon commission go back ,hence Manuwadi were not interested fir simon commission and still to day also they are not interested the welfare of Dalits ,shameful matter for the nation

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