सोशल मीडिया की मनुस्मृति – नेशनल दस्तक के फेसबुक पेज पर पाबंदी!


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सोशल मीडिया की मनुस्मृति. पुराने समय में वे आपकी जीभ काट लेते थे. अब भी वे आपको अपनी बात अपने लोगों तक पहुंचाने नहीं देंगे. भारतीय कटेंट को मॉनिटर कर रहे फेसबुक इंडिया के हैदराबाद, मुंबई और गुड़गांव के अधिकारियों शर्म करो. वजह तो बता दो? फेसबुक इंडिया ने नेशनल दस्तक के फेसबुक पेज पर पाबंदी लगा दी कोई भी लिंक डालने पर। यह सब बहुजनो की आवाज़ को दबाने के लिए किया गया है।

पढ़े – कौन है जो डिजिटल दलित से डर रहा है और बहुजन वेबसाइट पर रोक लगा रहा है?

बहुत कठिन है डगर पनघट की!

आज से लगभग दस साल पहले जब पहले फेसबुक और फिर ट्विटर आया और फिर ह्वाट्सऐप तो ऐसा लगा था कि कॉरपोरेट-सवर्ण मीडिया के एकछत्र राज के सामने अपनी बात करने का एक लोकतांत्रिक मंच हमें मिल गया है.

शुरुआत में कस्टमर जोड़ने के लिए सोशल मीडिया ने उदारता से हम सबको अपनी बात कहने का मौका भी दिया. भारत में अगर करोड़ों कस्टमर चाहिए तो बहुजनों को तो साथ लेना ही पड़ेगा. आबादी का हिसाब ही ऐसा है.

यहां तक सब ठीक चल रहा था. हम सब कटेंट लिख रहे थे. फोटो और वीडियो शेयर कर रहे थे. गुडमॉर्निंग और गुड नाइट कर रहे थे, तो सब खुश थे.

फिर RSS ने सोशल मीडिया का राजनीतिक इस्तेमाल बड़े पैमाने पर करने की नीति बनाई. कई शहरों में बीजेपी के कॉल सेंटर खुल गए. वहां से सांप्रदायिक जहर फैलाया जाने लगा. मोदी की ब्रांडिंग शुरू हुई. 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी का सोशल मीडिया इतना बड़ा हो चुका था कि बाकी सभी दलों का मीडिया उनके सामने बौना था.

यहां तक भी सब ठीक चल रहा था.

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हिंसा फैलाने वाले किसी पेज पर पाबंदी नहीं लगी.

संघी-हिंसक सोच के सारे पेज बदस्तूर चलते रहे.

लेकिन फिर बहुजनों ने भी सोशल मीडिया और इंटरनेट का इस्तेमाल शुरू किया. SC, ST, OBC, माइनॉरिटी के लोग देर से आए, पर जल्द ही उन्होंने अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करा दी.

सैकड़ों ऐसे ग्रुप और पेज बन गए, जिनसे लाखों लोग जुड़ गए. इसका असर यह होने लगा की गूगल को बाबा साहेब और सावित्रीबाई फुले की जयंती पर अपना डूडल बनाना पड़ा. बात असर करने लगी.

यहां आफत हो गई.

फेसबुक बेशक अमेरिका में रजिस्टर्ड कंपनी है. लेकिन इसका भारतीय कंटेंट भारतीय अधिकारी ही मॉनिटर करते हैं.

भारतीय अधिकारियों का धर्म भी होता है और उनकी जाति भी होती है.

तो जिन भारतीय अधिकारियों ने किसी दंगाई पेज पर आजतक पाबंदी नहीं लगाई, उन्होंने बहुजन, लोकतांत्रिक पेजों पर पाबंदी लगाने का सिलसिला शुरू कर दिया.

इसका ताजा शिकार नेशनल दस्तक है. कई लोग और पेज पहले इस मनमानी के शिकार हो चुके हैं. फेसबुक पर नेशनल दस्तक से जु़ड़े साढ़े तीन लाख लोग इसकी खबरों का लिंक नहीं देख सकते, क्योंकि फेसबुक ने बिना कारण बताए, इस पर रोक लगा दी है.

मतलब कि आप समझ सकते हैं कि भारत में बहुजन मीडिया का रास्ता कितना कठिन है.

सबसे पहले तो आपको अपने लोगों को बताना है कि कॉरपोरेट-जातिवादी मीडिया पर भरोसा करना बंद कीजिए, जो कि बेहद मुश्किल काम है, और जब आप यह कर लेते हैं, तो आपको अपनी बात कहने से रोक दिया जाता है.

बहुत कठिन है डगर पनघट की!

#IAmWithNationalDastak

— दिलीप मंडल की कलम से

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3 Comments

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  1. 1
    Ajay kumar

    We the rular of the land……give us some time to prove it . They hats bahujans because they feares us……jai bheem jai bharat ……namo budhhay

  2. 2
    Sharma Brahmin

    When will this casteist site Velivada be banned, it is even more dangerous than National Dastak. Hopefully, it will be very soon be banned. Jai Sri Ram.

    • 3
      Velivada

      Sharma, stop dreaming and go back to your RSS websites and drink some cow urine so that your mind comes back to senses.

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