बहुसंख्यक मूलनिवासी और अल्पसंख्यक ब्राह्मणवादी


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पिछले हफ्ते सहारनपुर में बहुसंख्यक मूलनिवासियों और अल्पसंख्यक ब्राह्मणवादियों में शुरू हुए नस्ली संघर्ष ने एक नये युग की शुरुआत कर दी है।  बाबासाहब अम्बेडकर की जयंती के बाद कुछ अल्पसंख्यक ठाकुरों द्वारा बहुसंख्यक मूलनिवासी चमार जाती के घरों पर हमलें किये गये, जिसके जवाब में चमारों ने भी उनका मुँह तोड़ जवाब दिया और देखते ही देखते यह नस्ली हिंसा पुरे सहारनपुर में फ़ैल गयी। जहाँ पहले हमेशा यह सुनने को मिलता था की ब्राह्मणवादियों ने मूलनिवासियों पर हमलें किये और उनके ऊपर ज़ुल्म ज़्यादती की, उसके बिलकुल उलट, सहारनपुर में चमार जाती ने इस क्रम को तोड़ते हुए ठाकुरों की अच्छी खासी ठुकाई की और उन्हें अपनी जान बचाने के लिए पुलिस की सहायता लेनी पड़ी।

इसके अलावा एक और बहुत महत्वपूर्ण बात जो इस सारे घटनाक्रम से उभर कर सामने आयी है, वो यह है की पहले हमेशा ब्राह्मणों द्वारा मूलनिवासी जातियों को ही एक दूसरे के खिलाफ उकसा कर लड़वाया जाता था।  जैसे की जाट, यादव, कुर्मी, लोधी आदि पिछड़ी जातियों को चमार, वाल्मीकि, धोबी, मलाह, आदि जैसी जातियों से भिड़वा कर, इन सभी मूलनिवासी जातियों को आपस में ही लड़वाया जाता था और इस सबका फ़ायदा सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक तौर पर 15% अल्पसंख्यक ब्राह्मणवादी लोग ही उठाते थे।

लेकिन पिछले कुछ दशकों से फुले-शाहू-अम्बेडकर की विचारधारा के पुरे देश में और ख़ास कर उत्तर भारत में फैलाव होने के कारण, अब इन सभी मूलनिवासी जातियों में आपस में भाईचारा बनता जा रहा है और 15% आबादी वाले अल्पसंख्यक ब्राह्मणवादी लोग अब अलग-थलग पड़ते जा रहे है।  इसलिये अब उनका यह फुट डालो और राज करो  का अभियान और नहीं चल पा रहा और उन्हें अपना दबदबा बनाये रखने के लिये सीधे ही मैदान में उतरना पड़ रहा है।  लेकिन मुठ्ठी भर संख्या होने के कारण, वो इस सीधी टककर में टिक नहीं पा रहे और चारों तरफ से उनकी ठुकाई हो रही है।

पुरे देश और दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचने वाले इस संघर्ष के पीछे एक ऐसा संघठन है जिसका एक वीडियो पिछले कुछ महीनों से लगातार सोशल मिडिया पर वायरल हो रहा जिसका नाम है “भीम आर्मी”।  इस संघठन के निर्माता सतीश कुमार को बताया जाता है, जिन्होंने उन मूलनिवासी जातियों, जिन पर ब्राह्मणवादियों द्वारा अन्याय-अत्याचार किया जाता है का मुक़ाबला करने के लिए एक मज़बूत संघठन बनाने की सोची।

उन्हें तब काफी बल मिला जब चंद्र शेखर नाम का एक विद्यार्थी वकालत करने के लिये वहां के एक कॉलेज में आया और वहां पर चल रही ठाकुरों की दादागिरी का जमकर जवाब दिया और कई गुंडों की पिटाई की। सतीश कुमार के दिमाग और चंद्र शेखर की हिम्मत ने देखते ही देखते “भीम आर्मी” को पुरे सहारनपुर ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब समेत कई राज्यों में भी फैला दिया और आज इसके हज़ारों कार्यकर्ता बताये जाते है।

जब मुठ्ठी भर ठाकुर “भीम आर्मी” से अपनी ठुकाई को नहीं रोक पाये, तो फिर उन्होंने EVM से घपला करवाकर बनवाई गयी, अपनी सरकार की मदद ली और पुलिस प्रशासन के गलत इस्तेमाल करना शुरू किया।  पता चला है की “भीम आर्मी” के नेता चंद्र शेखर सहित और सभी कार्यकर्ताओं पर झूठे मुक़दमे दायर किये जा रहे है और समाज की महिलाओं और बच्चों को बेवजह परेशान किया जा रहा है।  अब वो समय आ गया है, जब पुरे देश और विदेश के मूलनिवासी ST, SC, OBC और Minorities के संघटनों को “भीम आर्मी” और इसके नेता चंद्र शेखर के समर्थन में मैदान में उतर आना चाहिये ताकि भारत के 85% मूलनिवासी समाज के लोग, 15% वाले विदेशी ब्राह्मणवादी लोगों के कब्ज़े से इस देश को हमेशा-हमेशा के लिए आज़ाद करवा सके।

  • सतविंदर कुमार
Read -  Dysfunctional Government of RSS/BJP

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4 Comments

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  1. 1
    r.c.vivek

    Just aware all SC/ST/OBC and Muslims about their constitutional rights and create brotherhood among all sc/st/obc and muslims probe that they are mulnivasi of this country hence it is duty of mulnivasi to protect the country and our own society by gathering to gather and strong unity ,finally you will win the war of injustice and caste war .

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