वह समय दूर नहीं की भारत देश भारत रत्न डॉ आंबेडकर के संविधान के बजाय मनुस्मृति पर चले


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आरक्षण को आधार बना कर मनुवादी सरकारे मनुस्मृति को लगातार भारत पर लागु करना चाहती है। मनुवादी लोगो को बाबासाहेब के दवारा दलितों के लिए ले कर दिया गया क़ानूनी अधिकार बिलकुल भी अच्छे नहीं लगते इस लिए वो लगातार सविधान के साथ कुछ न कुछ बदलाव करने के लिए तत्पर रहते है जिस से दलितों के अधिकार उनसे वापिस ले लिए जाए और मनुसमृति देश पर लागु को सके।

आरक्षण आज हमारे  देश में एक महत्वपूर्ण मुद्दा है|दलितों एवं पिछडो को शिक्षा की ओर लाने के लिए बाबासाहब डॉ बी र आंबेडकर ने अनेको प्रयासो के बाद लंदन की राउंड मेज़ सभा में दलितों के हितो के लिए कई प्रस्ताव रखे उन में से एक आरक्षण भी था | वैसे तो दलितों के हित्त एवं शिक्षा के प्रति  लाभ छत्रपति शाहूजी महाराज ,महात्मा ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले ,नारायणा गुरु आदि द्वारा समय-समय  पर मिले लेकिन उनमे जटिलता का काम बाबासाहब ने ही किया था |उस समय बाबासाहब को भी विरोध झेलना पड़ा |लेकिन बाबासाहब की शेक्षिक योग्यता सबकी बोलती बंद कर देती थी |

बाबासाहब अक्सर सोचा  करते अगर वह शिक्षित नहीं  होते तो कुछ संभव न था | पुराणी शिक्षा प्रणाली जो की उस समय पूरी ब्राह्मण के इशारो पर थी उसमे दलितों और स्त्रियों की शिक्षा पूरी वर्जित थी| आप सोच रहे होंगे अगर वर्जित थी तो बाबासाहब कैसे पढ़े| बाबासाहब ने अपना बालकाल भारत में व्यतीत किया और आधार शिक्षा मुंबई विश्वविद्यालय में पूर्ण करी |वे उच्च शिक्षा प्राप्त करने विदेश चले गए थे| उन्होंने ने भी भेदभाव वाली ज़िन्दगी भारत  में रहकर जी |उन्हें पता था अगर भारत में रहा तो गुलाम ही रह जाऊँगा |जब दलितों की शिक्षा की बात आयी तोह बाबासाहब ने रूढ़िवादी -ब्राह्मणवादी सोच से बचने के लिए हर संभवता स्थान पर आरक्षण लागू करवाया |आज आरक्षण कुछ लोगो का नासूर बन गया है |दलितों एवं पिछडो को संपन्न देख यह सवर्ण जाती वाले परेशान और तो और जलन की भावना रखते है |

सवर्ण चाहते है कि मनुस्मृति का पालन हो जिसमे शूद्र और पिछडो का स्थान नीचे है |मै एक रोज़ एक टीवी चैनल पर देख रहा था जिसमे एक भागवत कथा वाचक कहता है कि भगवन ब्रह्मा के मुख से ब्राह्मण उत्पन्न हुए ,छाती से क्षत्रिय , पेट से वैश्य और उनके निचले भाग से शूद्र उत्पन्न हुए |अगर यह सब शिक्षा प्रणाली मे लाया जाए तो हमारा भारत  सबसे पीछा देश बन जायेगा | इन् सवर्णो ने हमें जानवर से भी  गया बीता समझा |भला यह हमें समानता प्रदान करते ? भला हमें शिक्षा मे हक़ देते?

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शायद बाबासाहब को पता था कि भविष्य मे ऐसा कुछ अवश्य होगा इसलिए उन्होंने दलितों का हित्त करा| मैंने एक जगह देखा कि कुछ लोग कह रहे आरक्षण हटाओ फिर मेरिट के आधार पर सामना करो मे कुछ नहीं बोला क्युकी वह सवर्ण इतिहास से अनजान है | लेकिन मैंने कह ही दिया की अगर शिक्षा मे समानता शुरू से रही  होती तो शायद आरक्षण न होता |आप सवर्णो ने हमें सभी सुविधाएं से वंचित रखा जैसे की मंदिर मे प्रवेश,शिक्षा,शादी धूमधाम से न करना ,अलग पानी का साधन आदि एवं अनंत |

दलितों को मज़बूत बनाने के लिए डॉ आंबेडकर ने हमें संविधान मे बराबर अधिकार एवं आरक्षण दिया है | मुझे एक सज्जन मिले पुणे मे , वो कह रहे थे की डॉ आंबेडकर पंडित थे| मेरे को कुछ क्षण हंसी आयी |वह बोले बाबासाहब पंडित थे ,मैंने कहा अच्छा फिर बाबासाहब ने मनुस्मृति का खंडन क्यों किया ?उनके पास  जवाब नहीं था फिर मैंने कहा फिर मैंने कहा बाबासाहब ने धरम क्यों बदला |इसका अर्थ यह आता है की अगर व्यक्ति सर्वगुण हो तो यह सवर्ण उन्हें अपना लेते है |सवर्ण बहुत कोशिश करते है आरक्षण हटाने की |बहुतो के मुँह से यह भी सुना है की आरक्षण केवल १० वर्षो तक था | १० वर्ष मे तो संवैधानिक  देश नया था यानी इनका कहना है की १९६० मे आरक्षण हट जाना चाहिए था | अगर देश की जीडीपी (विकास दर ) कम हो और नया हो उसमे दलित आरक्षण का क्या लाभ लेता| जो सरासर झूठ दलितों के खिलाफ फेलया जा रहा है। जीडीपी में दलितों का हिस्सा सब से जयादा होगा क्योकि दलित वर्ग ही काम करता है सब से जयादा।

यह सवर्ण  केवल कोशिश ही करते रहेंगे आरक्षण मिटाने की, आरक्षण के साथ और भी भयंकर करना चाहते है यह धीरे धीरे अधिकार छीनेंगे फिर अपनी रूढ़िवादी मनुस्मृति पर चलेंगे जिसमे मानवता ,समानता, और न्याय की हत्या है |लेकिन इन्हे यह  नहीं पता संविधान कोई खिलौना नहीं , हम एक लोकतांत्रिक देश के वासी है|

मगर सत्ता पर जिस दिन यह मनुवादी आ गए  तो वह समय दूर नहीं की भारत देश भारत रत्न डॉ आंबेडकर के संविधान के बजाय मनुस्मृति पर चले |इसको रोकने के लिए सभी बहुजनो का शिक्षित होना जरुरी है ,संगठित होना जरुरी है और वक्त आने पर संघर्ष करना भी अति आवश्यक है |अपनी राय मुझे  ज़रूर कमेंट करे| क्या आप सहमत  है ?

Author – Harshul Banodha

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11 Comments

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  1. 2
    Zulaikha Jabeen

    हम ज़ुलैख़ा जबीं, दिल्ली से. बहुत बधाई.
    समय के अनूकूल, प्रासंगिक और संग्रहित करने वाला आर्टिकल लिखा है आपने.
    लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को जागरूकता के साथ ही राजनीतिक सूझबूझ की बहुत ज़्यादा ज़रूरत होती है. आपने जिन ख़तरों की तरफ इशारा किया है वे जेनुईन हैं. ये तो आपको भी पता होगा भारत को आज़ादी मिलने के 22 बरस पहले (1925) हिंदूसभा को जनम दिया गया और इसके जन्मदाताओं ने तभी शपथ उठा ली कि 100 साल में हम भारत को पुन: हिन्दूराष्ट्र बना देंगे और मनु का विधान लागू करेंगे. उस वक़्त की हिन्दू महासभा आज की “आरएसएस” के पास 8 बरस बचे हैं अपने “गोल” तक पहुँचने के लिए.
    धार्मिक ध्रुवीकरण वो कर चुकी है. सामाजिक,सांस्कृतिक,आर्थिक, राजनैतिक रूप से ये कितने सशक्त बन चुके हैं इसका एक्ज़ाम्पल सोशल मिडिया में शोषण, उत्पीड़न, अत्याचार, बर्बरतम बलात्कार, जघन्यतम हत्याकांड के नित नए वायरल होने वाले वीडियो और ख़बरें हैं.
    बेशक, दलित, आदिवासी मनुवादी ब्राह्मणी व्यवस्था के सबसे पीड़ित और शोषित समुदाय हैं क्यूंकि उनकी वर्णव्यवस्था में यही जनसँख्या उनकी गुलामी के लिए चिन्हित की गई है. लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि आज (92 बरस बाद) दलित, आदिवासी उनकी सेना की अगली पंक्ति के बहुसंख्यक “प्रमुख” पैदल सैनिक भी हैं. वजहें बहुत सी हैं लेकिन हमारी नज़र में सबसे बड़ी वजह हैं- पढ़े-लिखे, संपन्न दलितों के भीतर बैठा ब्राह्मणवादी नज़रिया. जिसकी वजह से जाटव समुदाय (ज़्यादातर उच्च शिक्षित,संपन्न) के अलावा बाक़ी सभी का परित्याग किया जाना, छुआछूत बरतना, जिसकी वजह से उपजी भयंकर ग़रीबी, रोटी बेटी का रिश्ता नहीं रखना. अगर ये कहा जाए उन्हें शूद्र समझा जाता है तो कोई गलत नहीं होगा. दलितों में “महादलित” जैसा शब्द ग्राह्य होना इसका जीता जगता उदाहरण है. ख़ैर…..विस्तार में फ़िर कभी.
    हिन्दूराष्ट्र (ब्राह्मणी राष्ट्र) की राह में सिर्फ़ आरक्षण ही नहीं पूरा संविधान ही सबसे बड़ा “एकमात्र” रोड़ा है. मतलब, संविधान और लोकतंत्र दोनों का ख़ात्मा ज़रूरी है. इसलिए मुद्दे की एक सूत्रीय बात ये है कि किसी भी तरह सारे “एससी” और एसटी, पिछड़े और मायनोरिटी की एकजुटता बनाने की “ईमानदार” एकजुट कोशिश की जानी चाहिए. पिछड़े और मायनोरिटी के “सारों” को साथ लाना मुश्किल हो सकता है, थोड़ा एसटी को भी. लेकिन अगर सारा “एससी” ही वोट न बाँटने देने की शपथ लेकर, हिन्दुराष्ट्रवादियों को दोबारा सत्ता में नहीं पहुँचने देना है-की क़सम उठा लें तो नक़्शा बदल सकता है… (ध्यान रहे ये “इंडिया शाइनिंग वाला समय नहीं है आज उनके पास हर तरह की अपूर्व शक्ति है. नहीं है तो सिर्फ़ संविधान को बर्खास्त करने की शक्ति. थोड़े से सांसदों की कमी है जिसे किसी भी तरह पहले गुजरात चुनाव जीत कर, फिर 2019 का चुनाव रोककर वो आराम से हासिल कर सकते हैं.
    कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि जहाँ एक तरफ़ संविधान और लोकतंत्र के ख़ात्मे के लिए नि:संदेह दलितों का बंटा होना ही ज़िम्मेदार है तो वहीँ दूसरी तरफ़ संविधान और लोकतंत्र को ज़िंदा रखने वाली प्राणवायु भी दलित ही हैं …… सो पूर्ण एकता/एकजुट नि:स्वार्थ समर्थन के लिए स्ट्रेटेजी क्या /कैसी बनायीं जाए इसपे सोच विचार कीजिए, हमारी ज़रूरत जिस जगह, जिस भी काम के लिए पड़ेगी हम और बहुत सारे लोग आप सबके साथ हैं.

  2. 3
    Akshay

    Sir your right ..aur agar 2019 election me phir se bjp chunav jit jati hai to wo backward classes ke liye bahut ghatak ho skata hai…. Aur dr.babasaheb ji ne political reservation 10 sal ke rakhne ke liye bola tha aur education resevervation koi nhi mita sakta…lekin agar bjp 2019 me phir se chunav jit jati hai aur unke satta above 16 state me ati hai to wo under article 368 through unke agende ko safal karne ka prayas karenge…..

  3. 4
    Anu tapperwal

    M aapse blog se boht prabhavit hu, kyunki main in sab sachyion se vakif hu..
    Dr.B.R Ambekar ji meri prena ka starot hain, main in activities me participate bhi krna chahti hu, par mukhr pta nahi hai ki main ye sab kaise kru.
    I am PG degree holder (MBA) or apne smaaj k liye apne logon k liye kuch karna chahti hu.

    • 5
      Akshay

      Hi ..this is Akshay..agar aap such me society ke liye kuch karna hai to aap dr.babasaheb ne jo association established ki hai unme participate kar sakti hai….jaise ki bharatiya bauddha mahasabha aur samta sainik dal ….aur association ke through society me prabhodhan ka kam kar sakti hai….

  4. 6
    प्रतिक साबळे

    सही हे सर. लोगोके बीच में अभीभी प्रतिनिधित्व ( आरशन ) गलत फेमी है। वो दूर होनी आवश्यक है।

    • 9
      Velivada

      Yes, only the unity and fight against such forces can stop them. Stay united and voice against oppression and such mentality in which lower castes are not given any rights.

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