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    Avinash salve

    कुछ मित्र सवाल करते हैं ” जय भीमक्यों बोलते हो ? ” मैंबताना चाहतl हूँ जय भीम बोलने सेमतलब कोई पूजा करनेया भक्ति करने से नहीं है । जय भीमबोलकर हमकृतज्ञता प्रकट करते हैं उस महामानव केप्रति जिसनेहमको सही मायनों में इंसानबनाया और इंसानी अधिकारदिलाये वर्ना उससे पहलेहमारा जीवन क्या था ? पशुओ केसमान जीवन व्यतीत करते थे हम ।हमको पानी नहीं पीनेदिया जाता था । हम उसपानी को भी नहीं पी सकते थेजिसको पशु पक्षी पी सकते थे । बहुतसे लोग पानी के अभावमें तड़प तड़पकर दम तोड़ देते होंगे औरबहुत से गन्दा अशुद्धपानी पीकर अपने जीवन के लिएसंघर्ष करते होंगे । इसस्थिति में उन पशुओं और इंसानों मेंक्या फर्क रह गया था ?बाबा साहब ने हमको पानी दिलानेके लिए संघर्षकिया इसलिए हम जय भीम बोलते हैं ।हमको अछूतबनाया गया । सोचो अगर कोई अछूतबीमारहोता होगा तो वो बिना इलाज केही दम तोड़देता होगा क्योंकि कोई भी वैद्यउसका इलाज करनेनहीं जाता होगा । अगर कोई वैद्यउसको स्पर्शकरेगा तो वो अपवित्र हो जायेगा ।इस प्रकार इलाज केअभाव में मरीज तड़प तड़पकरमरेगा ही । इस स्थिति सेहमको बाबा साहब ने उबारा और इसअमानवीय व्यवहारको गैरकानूनी घोषित किया ।बाबा साहब के इन्ही उपकारो सेकृतज्ञ होकर हम जय भीमबोलते है —

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